केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन की गरिमा बढ़ाई

विश्व थेरवाद बौद्ध केंद्र द्वारा आयोिजत सम्मेलन में देश-विदेश के बौद्ध प्रितिनिधयों, विद्वानों और भिक्षुसंघ ने लिया भाग; 24 शोधपत्र प्रस्तुत, करुणा,
पयार्वरण संरक्षण और विश्व शांति पर दिया गया जोर।

देहरादून, 26 अक्टूबर 2026। विश्व थेरवाद बौद्ध केंद्र द्वारा सोमवार को देहरादून के राजपुर रोड स्थित हयात सेंट्रिक में “अश्विन पूर्णिमा एवं थेरवाद बौद्ध धर्म में भिक्षुओ के वषार्वास का महत्त्व” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश के बौद्ध भिक्षुओ, विद्वानों, आध्याित्मक प्रतिनिधियों और गणमान्य अतिथितियों ने भाग लिया। भूटान, म्यांमार, नेपाल, दिक्षण कोरिया, वियतमान, यूनाइटेड किंगडम सहित विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने बौद्ध परंपराओं, नैतिक मूल्यों, आध्याित्मक अनुशासन और विश्व शांति के समकालीन महत्त्व पर अपने विचार साझा किये।

कायर्क्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री माननीय श्री जीतन राम मांझी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री माननीय श्री गणेश जोशी उपिस्थत रहे। सम्मेलन का आयोजन विश्व थेरवाद बौद्ध केंद्र के अध्यक्ष डॉ. एम. के. ओटानी के नेतृत्व में किया गया। डॉ. हीरो हितो ने सम्मेलन के समग्र संयोजक के रूप में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि उद्घाटन संबोधन श्री एच. पी. कैन, आईआरएस (सेवािनवृत्त) ने प्रस्तुत किया।

जीतन राम मांझी ने प्रेम, करुणा और मानवीय मूल्यों पर दिया जोर

मुख्य अतिथि श्री जीतन राम मांझी ने अपने संबोधन में कहा की शिक्षा का वास्तिवक उद्देश्य केवल शैक्षिणक डिग्रियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर प्रेम, करुणा, संवेदनशीलता और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया की शिक्षा तभी साथर्क बनती है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के आचरण, सामािजक व्यवहार और मानव सेवा में दिखाई दे।

कबीर के प्रसिद्ध दोहे “ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय” का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रेम को सच्चे ज्ञान और मानवीय संबंधों का आधार बताया। उन्होंने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं – मैत्री और करुणा को भारत की प्राचीन अवधारणा “वसुधैव कुटुम्बकम्” अथार्त सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है से जोड़ते हुए कहा की मानवता को विभाजनों से ऊपर उठकर आपसी समझ, सद्भाव और सहयोग को मजबूत करना चाहिए।

श्री मांझी ने पयार्वरण संरक्षण, वनों की रक्षा, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने प्रकर्ति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार और सभी जीवों के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता पर बल दिया। उनके संबोधन का मूल संदेश था की ज्ञान का वास्तिवक मूल्य तभी है, जब वह करुणामय व्यवहार, सामािजक जिम्मेदारी और मानव कल्याण के रूप में प्रकट हो।

 

गणेश जोशी ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को बताया विश्व शांति का मार्ग

उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी ने देवभूिम उत्तराखंड में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश – विदेश से आए प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं —करुणा, अहिंसा, मैत्री और शांति की वतर्मान वैश्विक परिस्थितियों में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा की शांति केवल शब्दों से स्थािपत नहीं होती, बल्कि हमारे विचारो, व्यवहार और दूसरों के प्रति सम्मान से जन्म लेती है। अश्विन पूर्णिमा और वर्षावास की परंपराएँ आत्मचिंतन, अनुशासन और अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देती हैं।

श्री जोशी ने कहा की ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के साथ-साथ विभिन्न देशों के बीच मित्रता, संवाद और सहयोग को भी प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने विश्व थेरवाद बौद्ध केंद्र और इसके अध्यक्ष डॉ. एम. के. ओटानी को इस महत्त्वपूर्ण आयोजन के लिए बधाई दी तथा भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने, जरूरतमंदों की सहायता करने और आने वाली पीढ़ियों तक शांति एवं मानवता का संदेश पहुँचाने का आह्वान किया।

उन्होंने अपने संबोधन में यह संदेश दिया की जहाँ करुणा होती है, वहाँ विश्वास जन्म लेता है; जहाँ विश्वास होता है, वहाँ सद्भाव विकसित होता है; और जहाँ सद्भाव होता है, वहीं विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।

 

डॉ. एम. के. ओटानी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समुदाय एक मंच पर आया

विश्व थेरवाद बौद्ध केंद्र के अध्यक्ष डॉ. एम. के. ओटानी के नेतृत्व में आयोजित इस सम्मेलन ने विभिन्न देशों के बौद्ध प्रतिनिधियों, महा-संघ के सदस्यों, विद्वानों और शोधकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान किया। सम्मेलन का उद्देश्य बौद्ध दर्शन, आध्यात्मिक साधना, शैक्षिणक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्सािहत करना था।

डॉ. ओटानी के नेतृत्व में केंद्र ने अकादमिक चर्चा के साथ-साथ बौद्ध धार्मिक परंपराओं को भी कायर्क्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया। सम्मेलन के दौरान 24 शोधपत्र प्रस्तुत किये गए, जिनमे आश्विन पूर्णिमा, वर्षावास और बौद्ध परंपराओं की समकालीन प्रासंगिकता पर विद्वत्तापूर्ण विमर्श हुआ।

केंद्र द्वारा बौद्ध भिक्षुसंघ को पारम्परिक पीले चीवर अर्पित किये गए तथा उनके लिए संघ भोज का आयोजन भी किया गया। यह आयोजन बौद्ध धर्म में दान की परंपरा और गृहस्थ समुदाय तथा भिक्षुसंघ के बीच पारस्पिरक सहयोग के महत्त्व को दशार्ता है।

एच. पी. कैन ने अश्विन पूर्णिमा और वर्षावास के आद्यात्मिक महत्त्व पर प्रकाश डाला

श्री एच. पी. कैन, आईआरएस (सेवािनवृत्त) ने उद्घाटन संबोधन में सभी अतिथियों, बौद्ध महा-संघ के सदस्यों, विद्वानों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा की यह सम्मेलन केवल एक धार्मिक परंपरा पर चर्चा करने का अवसर नहीं है, बल्कि ऐसी कालजयी विचारधारा को समझने का भी प्रयास है, जो मानवता को शांति, करुणा, अनुशासन और प्रज्ञा का मार्ग दिखाती है।

उन्होंने थेरवाद बौद्ध परंपरा में वर्षावास के महत्त्व को समझाते हुए बताया की यह अविध भिक्षुओ के लिए साधना, अध्ययन, आत्मानुशासन और धम्म के गहन चिंतन का अवसर होती है। उन्होंने पवारणा परंपरा का उल्लेख किया, जिसमे संघ के सदस्य परस्पर सम्मान और आत्मसमीक्षा की भावना से आध्याित्मक विकास के लिए एक-दूसरे को अपनी कमियों की ओर ध्यान दिलाने का अवसर देते हैं। उन्होंने कठिन परंपरा के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला, जिसके दौरान गृहस्थ श्रद्धालु भिक्षुसंघ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सहयोग प्रदान करते हैं।

श्री कैन ने कहा की संयम, सजगता, अध्ययन और सद्भाव जैसे मूल्य आज के समय में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं, जब विश्व संघर्ष, असिहष्णुता, पयार्वरणीय क्षरण और सामािजक विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की, की सम्मेलन थेरवाद बौद्ध धर्म की समझ को गहरा करने के साथ-साथ शिक्षा, सांस्कृितक आदान-प्रदान, शांति और मानव कल्याण के लिए साथर्क सहयोग को प्रेरित करेगा।

डॉ. हीरो हितो ने सम्मेलन के समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता में निभाई प्रमुख भूमिका

डॉ. हीरो हितो ने सम्मेलन के समग्र संयोजक के रूप में कायर्क्रम के शैक्षिणक, संगठनात्मक और अंतरराष्ट्रीय समन्वय में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके समन्वय में आयोजित कायर्क्रम ने राष्ट्रीय अतिथियों, बौद्ध महा-संघ, शोधकतार्ओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर बौद्ध परंपराओं तथा उनके समकालीन महत्त्व पर संवाद का अवसर प्रदान किया।

सम्मेलन में 24 शोधपत्रों की प्रस्तुति, विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के संबोधन और बौद्ध आध्याित्मक अनुष्ठानों का समावेश इसकी शैक्षिणक एवं सांस्कृितक महत्ता को दशार्ता है। कायर्क्रम ने बौद्ध ज्ञान के संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग और बौद्ध मूल्यों को सामाजिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

सम्मेलन का व्यापक संदेश यह रहा की बौद्ध शिक्षाएं केवल पुस्तकों और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रहें, बल्कि वे नैतिक आचरण, करुणा, पयार्वरण संरक्षण और मानव सेवा के रूप में जीवन में दिखाई दें।

त्सेरिंग यांगज़ोम ने वर्षावास को बताया आत्मपरिवर्तन का अनुशासन

सम्मेलन की मुख्य वक्ता श्रीमती त्सेरिंग यांगज़ोम ने अपने संबोधन में वर्षावास को आत्मपरिवर्तन का अनुशासन और अश्विन पूर्णिमा को धम्म के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का अवसर बताया।

उन्होंने कहा की वर्षावास भिक्षुओं को ध्यान, अध्ययन, नैतिक अनुशासन और आध्याित्मक विकास के लिए विशेष समय प्रदान करता है। पवारणा परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने विनम्रता, उत्तरदायित्व स्वीकार करने और अपनी कमियों को सुधारने की भावना को व्यक्तिगत तथा सामूिहक विकास के लिए आवश्यक बताया।

उन्होंने वर्षावास से मिलने वाली चार प्रमुख शिक्षाओं—पयार्वरण के प्रति ज़िम्मेदारी, मानिसक अनुशासन, सामाजिक सद्भाव तथा शिक्षा और संवाद—पर विशेष जोर दिया। उनके अनुसार, आधुिनक संस्थानों, विश्व विद्यालयों, सरकारों और समुदायों को भी आत्मिचंतन, संवाद और निरंतर सुधार की संस्कृति अपनानी चाहिए।

श्रीमती यांगज़ोम ने बौद्ध विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से प्राचीन बौद्ध ज्ञान को आधुिनक शोध और समकालीन सामजिक आवश्यकताओं से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने मठों और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, युवा सहभागिता, पर्यावरणीय परियोजनाओं तथा ध्यान और शांति से जुड़े कायर्क्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा की धम्म का अध्ययन करने का वास्तिवक उद्देश्य केवल अधिक ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि अधिक विवेकपूर्ण जीवन जीना और मानवता की सेवा करना है।

डॉ. धम्मदीप इला ने प्रस्तुत किया दक्षिण कोरिया का बौद्ध दृष्टिकोण

दक्षिण कोरिया स्थित इंटरनेशनल मैडिटेशन सेंटर की अध्यक्ष डॉ. धम्मदीप इला ने आश्विन पूर्णिमा पर कोरियाई बौद्ध दृिष्टकोण प्रस्तुत करते हुए ध्यान, आध्यात्मिक अनुशासन, कृतज्ञता और करुणा के महत्त्व को रेखांकित किया।

उन्होंने बताया की कोरियाई महायान बौद्ध धर्म और थेरवाद बौद्ध धर्म की परंपराओं एवं साधना-पदत्तियों में अंतर होने के बावजूद दोनों का मूल उद्देश्य दुःख से मुक्ति और सभी जीवों के प्रति करुणा विकसित करना है। उन्होंने कोरिया की सॉन ध्यान परंपरा का उल्लेख करते हुए सजगता, आंतिरक शांति और प्रज्ञा के विकास को बौद्ध साधना के महत्वपूर्ण पक्ष बताया।

डॉ. धम्मदीप इला ने भारत और कोरिया के बीच बौद्ध विरासत से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने के लिए शैक्षिणक सहयोग, संवाद, ध्यान कायर्क्रमों और बौद्ध समुदायों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने डॉ. माधुरी बरथवाल तथा अन्य प्रतिभागियों के साथ हार्ट सूत्र के पाठ में भी सहभागिता की, जिससे कायर्क्रम में आध्याित्मक चिंतन का विशेष आयाम जुड़ा।

डॉ. माधुरी बरथवाल और अनुज हितो को विश्व शांति पुरस्कार

सम्मेलन का एक प्रमुख आकषर्ण मुख्य अितिथ श्री जीतन राम मांझी द्वारा डॉ. माधुरी बरथवाल और श्री अनुज हितो को विश्व शांति पुरस्कार प्रदान करना रहा।

यह सम्मान समारोह शांति, मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति सम्मेलन की प्रतिबद्धता का प्रतीक बना। कायर्क्रम में इस बात पर जोर दिया गया की करुणा, परस्पर सम्मान और मानव सेवा जैसे मूल्य अधिक शांतिपूर्ण एवं सद्भावपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

वियतनामी बौद्ध संघ द्वारा पुण्य अनुमोदन

कायर्क्रम में वियतनामी बौद्ध संघ द्वारा पुण्य अनुमोदन किया गया। यह बौद्ध परंपरा के उस भाव को दशार्ता है, जिसमे शुभ कार्यो और आध्याित्मक गतिविधियों से अर्जित पुण्य का अनुमोदन किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, विश्व थेरवाद बौद्ध केंद्र द्वारा भिक्षुसंघ को पीले चीवर अर्पित किये गए और संघ भोज आयोजित किया गया। इन धार्मिक गतिविधियों ने बौद्ध धर्म में दान, कृतज्ञता, सद्भाव और गृहस्थ समुदाय तथा भिक्षुसंघ के बीच पारस्पिरक सहयोग की परंपरा को रेखांकित किया।

उषा ओटानी ने व्यक्त किया आभार

कायर्क्रम के अंत में श्रीमती उषा ओटानी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि श्री जीतन राम मांझी, विशिष्ट अतिथि श्री गणेश जोशी, बौद्ध महा-संघ के सदस्यों, डॉ. धम्मदीप इला, परम पूज्य भदंत शील रतन, श्री एच. पी. कैन, डॉ. एम. के. ओटानी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, विद्वानों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने डॉ. एम. के. ओटानी के नेतृत्व और प्रयासों की सराहना की, जिनके माध्यम से विभिन्न देशों के बौद्ध प्रतिनिधियों और विद्वानों को एक मंच पर एकत्रित किया गया। उन्होंने आयोजन समिति, स्वयंसेवकों, तकनीकी सहयोगियों, आतिथ्य व्यवस्था से जुड़े सदस्यों और हयात सेंट्रिक, देहरादून के प्रबंधन एवं कर्मचारियों को भी धन्यवाद दिया।

श्रीमती ओटानी ने आशा व्यक्त की की सम्मेलन से भविष्य में शैक्षिणक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संबंधों, विश्व शांति और मानव कल्याण से जुड़ी साथर्क पहल को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने सभी से वर्षावास की भावना को दैनिक जीवन में अपनाने तथा सजगता, करुणा, नैतिक आचरण और आत्मानुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

सम्मेलन के आयोजन में श्रीमती पल्लवी, श्री राजीव कुमार, श्री जोनी कुमार, श्री बिंबसार ओटानी, श्री नारू हितो, सुश्री प्रज्ञा ओटानी, सुश्री अनुष्का ओटानी और श्री मनीष जोशी ने सहयोग दिया।

विश्व शांति और मानवीय एकता का संदेश

सम्मेलन ने वतर्मान समय में बौद्ध भिक्षुओं की प्रासंगकिता को रेखांकित करते हुए सामािजक विभाजन, पर्यावरणीय चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय समझ की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया। अकादमिक शोध, आध्यात्मिक परंपराओं और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के माध्यम से कायर्क्रम ने करुणा, प्रज्ञा, नैतिक आचरण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को अधिक सामंजस्यपूर्ण विश्व की आधारिशला बताया।

सम्मेलन का केंद्रीय संदेश भारत की कालजयी अवधारणा “वसुधैव कुटुम्बकम्” में निहित रहा – की स्थायी शांति तभी संभव है, जब मानवता अपनी साझा जिम्मेदारियों को समझे और सभी जीवों के कल्याण के लिए मिलकर कार्य करे।

 

आयोजक: विश्व थेरवाद बौद्ध केंद्र
अध्यक्ष: डॉ. एम. के. ओटानी
समग्र संयोजक: डॉ. हीरो हितो
स्थान: हयात सेंट्रिक, राजपुर रोड, देहरादून, उत्तराखंड
दिनांक : 26 अक्टूबर 2026

  • Ravi Kumar Anand

    Owner, Editor & Publisher of Police Suraksha & Sunday Cricket / Contact No. +91 9350012218

    Related Posts

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    अंतरराष्ट्रीय

    केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन की गरिमा बढ़ाई

    केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन की गरिमा बढ़ाई

    The Golden Gate’s Timeless Majesty

    The Golden Gate’s Timeless Majesty
    Ultimate Sports Ground Experience

    The Art of Mindful Eating

    The Art of Mindful Eating

    Mind-Body Connection for Meditation

    Mind-Body Connection for Meditation

    Digital Detox Unplug and Reconnect

    Digital Detox Unplug and Reconnect